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खुली जेल को मिली मंजूरी, जल्द ही उज्जैन में बनेगी
उज्जैन । होशंगाबाद और सतना के बाद अब उज्जैन में प्रदेश की तीसरी खुली जेल बनने जा रही है। होशंगाबाद में वर्ष 2010 में खुली जेल बनाई गई थी। सतना में इस तरह की जेल निर्माणाधीन है। उम्मीद है कि इस मार्च-अप्रैल तक इसका काम पूरा हो जाएगा। उज्जैन में भी ओपन जेल को खोले जाने के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। ओपन जेल में न तो चाहरदीवारी होती है और न ही कैदियों पर निगरानी के लिए गार्ड रखे जाते हैं। ये कहीं भी आ-जा सकते हैं। घूम फिर सकते हैं। यहां तक कि परिवार के साथ भी रह सकते हैं। जेल प्रशासन आजीविका चलाने के लिए इनके लिए नौकरी या काम धंधे का भी इंतजाम करता है। ओपन जेल (बिना सलाखों वाली) में आजीवन कारावास की सजा पाए ऐसे कैदी जो कम से कम 10 साल की सजा काट चुके हों, आचरण उत्तम होता है, उन्हें रखा जाता है। ताकि बचे चार साल वे परिवार के साथ रहकर खुद को समाज की मुख्य धारा से जोड़ सकें। अपनी जिम्मेदारियों को समझें। सजा पूरी होने के बाद जब घर जाएं तो परिवार का भरण पोषण आसानी से कर सकें।